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Tuesday, 30 July 2013

नीति और नियत- ग़ुलाम कुन्दनम

बात भी हो अच्छे-अच्छे,
व्यवहार में भी सच्चे-सच्चे,
दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

पैदल-साइकिल आम सवारी
इन से नापेंगे दुनिया सारी,
हमारी गाड़ी पेट्रोल से नहीं,
सिर्फ पसीने से ही चलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

हिम्मत के साथ नेक इरादे,
करते नहीं हम झूठे वादे,
देश के प्रति ऐसी श्रद्धा से,
दीप से दीप जलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

- ग़ुलाम कुन्दनम

जीवन मैग जनवरी 2014 अंक से उद्धृत- मूल अंक यहाँ से डाउनलोड करें - https://ia600505.us.archive.org/7/items/JeevanMag4/Jeevan%20Mag%204.pdf

Saturday, 22 December 2012

दिल्ली: कंट्री कैपिटल या रेप कैपिटल?

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दिल्ली बलात्कार कांड ---हम शर्मिंदा हैं 


राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपराध की घटनाओं पर लगाम लगाने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा ने मंगलवार को कहा कि बलात्कार के दोषी लोगों को फांसी देनी चाहिए।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने इस विषय पर संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है, ऐसी घटनाएं बार बार हो रही है। हम इस मुद्दे को संसद में पूरी ताकत से उठायेंगे।
उन्होंने कहा कि राजग के सहयोगी दलों की महिला सांसद संसद भवन परिसर मे इस विषय पर धरना देंगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का केंद्र हो गया है और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

प्रसाद ने कहा कि भाजपा हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को विशेष दर्जा प्रदान करने के बारे में संविधान संशोधन विधेयक के गंभीर मुद्दे को भी लोकसभा में उठायेगी। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।

भाजपा सदस्य सैयद शाहनवाज हुसैन ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है, दिल्ली में कानून व्यवस्था समाप्त हो गई है। इस विषय पर हमने प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया है।

मीरा कुमार ने उद्वेलित सदस्यों को शांत करते हुए कहा कि यह गंभीर मामला है, जघन्य कृत्य है। इसे शून्य प्रहर में उठायें।

गौरतलब है कि दिल्ली में उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली एक पैरा मेडिकल छात्रा के साथ बस में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसे बाहर फेंक दिया गया।

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़ा करने वाली यह घटना दक्षिणी दिल्ली के महिपालपुर के निकट घटी। पीड़िता एवं उसके दोस्त की आरोपियों ने पिटाई की।

दोनों को एम्स ट्रामा सेंटर ले जाया गया। बाद में लड़की को सफदरजंग अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया। लड़की की हालत गंभीर बताई गई है। बलात्कार और निर्दयी यातनाओं के बाद रविवार को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती लड़की को अब भी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया है।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बीडी अठानी ने कहा कि उसकी स्थिति कल से बेहतर हुई है। उसकी चेतना का स्तर कल से काफी बेहतर हुआ है। उसकी रविवार को एक सर्जरी हुई है। उन्होंने कहा कि पीड़ित लड़की पर अगले 48 से 72 घंटों तक डॉक्टरों द्वारा करीबी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर नियमित रूप से उसकी स्थिति देख रहे हैं, ताकि उसका सर्वश्रेष्ठ इलाज हो सके।

डॉक्टर ने कहा कि लड़की का चेतना स्तर कल से काफी बेहतर हुआ है और उसका लगातार इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि चोटों की प्रकृति को देखते हुए हम अब भी उसे खतरे से बाहर नहीं कह सकते। डॉक्टरों ने कहा कि मेडिकल छात्रा के सिर और चेहरे पर काफी चोटें लगी हैं, क्योंकि उस पर लोहे की छड़ से निर्दयता से हमला किया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि सरकार को ऐसे कड़े कदम उठाने चाहिए जिससे कि सामूहिक बलात्कार जैसी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो जैसा कि राजधानी में 23 वर्षीय एक लड़की के साथ हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सामूहिक बलात्कार की शिकार 23 वर्षीय लड़की की हालत के बारे में जानकारी लेने सफदरजंग अस्पताल पहुंचीं।

सोनिया ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा से बातचीत की और उनसे हरसंभव कदम उठाने को कहा जिससे सुनिश्चित हो कि इस तरह की घटनाएं फिर से न हों।

कांग्रेस महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म मामले पर सोनिया चाहती हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाए। इससे पहले दिन में संसद के दोनों सदनों ने दक्षिण दिल्ली में चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर चिंता व्यक्त की।

पार्टी विचारधारा से उपर उठकर विभिन्न दलों के सदस्यों ने ऐसे अपराध को अंजाम देने वालों को मृत्युदंड देने की मांग की.....


सन्दर्भ- जीवन मैग फेसबुक पेज... www.facebook.com/jeevanmag

अब पढ़िए इस विषय पर गुलाम कुन्दनम  की  एक कविता

Delhi rape issue

पुजारी ही बदलने होंगे.
.................................

अध्यात्म और नैतिक शिक्षा
व्यवहार में उतारने की दीक्षा
ये शिक्षा नीति बनाने के लिए
शिक्षा मंत्री ही बदलने होंगे.

छोड़ें भौतिक - भोगवादी जीवन
अपनाएँ मानवतावादी नवजीवन,
ये सोंच विकसित करने के लिए
योजनायें भी बदलने होंगे.

सरलता शालीनता में हो आस्था,
बदलने होंगे सामाजिक व्यवस्था,
माहौल को बदलने के लिए
व्यवस्थापक भी बदलने होंगे .

जो खुद ही नंगा नाच करते,
वे कड़े क़ानून बनाने से डरते,
माँ भारती के सम्मान के लिए
अब पुजारी ही बदलने होंगे. ..2


ॐ . ੴ . اللّٰه . † ……. Om.Onkar. Allâh.God….. Jai Hind! Jai Jagat (Universe)! -

Ghulam Kundanam,.Mobile No- 9931018391.

बाबा नागार्जुन की दो कवितायेँ---संसद को लकवा मार गया है

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 बाबा नागार्जुन की दो कवितायेँ जो आज भी काफी प्रासंगिक हैं, संसद को लकवा मार गया है और सत्य।
 हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर रहे नागार्जुन को जीवन मैग टीम की ओर से शत-शत नमन।

सौजन्य से- गुलाम कुन्दनम (फेसबुक पेज पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें)

Monday, 17 December 2012

निष्काम भक्ति और निष्काम देशभक्ति- गुलाम कुन्दनम


निष्काम भक्ति
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सकाम भक्ति से
क्षणिक सांसारिक
सुख मिलता.

निष्काम भक्ति से
अनंत असीमित
आनंद घुलता.

सकाम मुल्ला-महंथ
लालच-घृणा
अंधविश्वास फैलाते.

निष्काम संत-फकीर
सबके दिलों में प्रेम की
गंगा-जमुना बहाते.

(धर्म-मजहब को.... मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर-गुरुद्वारों को ... पाक - पवित्र बनाना है तो उसकी जिम्मेवारी निष्काम भक्क्ति करने वाले संत-फकीरों को मिलनी चाहिए जो धन संग्रह नहीं करते... धर्म स्थलों को व्यापार का साधन नहीं बनाते... जिन्हें शिर्फ़ अपने खाने पहनने से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होता है.... धर्म स्थलों की आमदनी को गरीबी उन्मूलन कोष बनाकर गरीबनावाजी के काम में ...दरिद्र नारायण के उत्थान में लगाया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए. )

निष्काम देशभक्ति
---------------------

सकाम देशभक्ति से
पद और पैसे का
लोभ आ जाते.

निष्काम देशभक्ति से
हम शहीदों का
कर्ज चुकाते.

सकाम नेता भी
समाज में
घृणा फैलाते.

जाति-संप्रदाय
भाषा क्षेत्र पर हमें
वोट बैंक बनाते.

निष्काम नेता होते
न वतन टूटता, न हम
भाई भाई का खून बहाते.

(सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन :- दल विहीन लोकतंत्र की स्थापना , लाभ रहित विशुद्ध समाज सेवा वाली राजनैतिक व्यवस्था, वर्ग विहीन समाज की स्थापना, सबके लिए समान और निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था, गरीबी उन्मूलन कोष की स्थापना [धर्म स्थलों की आमदनी भी इसी कोष में जमा हो], जनलोकपाल, चुनाव सुधार तथा काला धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने जैसे क़ानून, सभी करों को समाप्त कर एक समान कर प्रणाली ट्रांजेक्सन टैक्स लगाना, सभी तरह के लेन-देन बैंक, चेक या मोबाइल के द्वारा किया जाना सुनिश्चित करना, बड़े नोटों का प्रचलन बंद करना....सरकार के निर्णयों में जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी... ग्राम स्वराज और मोहल्ला स्वराज की स्थापना ... ये सब कुछ नए और विचाराधीन समाधान हैं .....जो भारत और भारत के लोगों को संच्चाई, ईमानदारी और मानवता पर आधारित एक नए युग में ले जायेंगे.)
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है वो भारत को ऐसे सपूत दें ....
..जो मादर-ए-हिंद... माँ भारती .... की निष्काम देशभक्ति करें....

ॐ . ੴ . اللّٰه . † …….
Om.Onkar. Allâh.God…..
Jai Hind! Jai Jagat (Universe)!

-Ghulam Kundanam,
Team Jeevan Mag
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Friday, 30 November 2012

धर्म-मजहब की सीमा- गुलाम कुन्दनम








 आत्मिक-रूहानी उन्नति का मार्ग,
बताना-दिखाना ही धर्म का कार्य,
पूजा - नमाज - अरदास - प्रार्थना
की विधियाँ बतायें इनके आचार्य.

फतवे-फरमान-आदेश-हिदायत,
जैसे नहीं हो अनुचित अधिकार,
सुझाव-सलाह तक सीमित रहें वो,
प्रसारित करें वो सिर्फ़ सुविचार.

इंसानियत-मानवता की कसौटी,
बने किसी भी कानून का आधार.
धर्म-मजहब की आड़ में कोई ,
करे न मानवता को तार -तार.


कपडे, खान-पान और कानून में धर्म-मजहब को घसीटा जाना अनुचित है. आधुनिक आयरलैंड में अन्धविश्वास-आधारित कानून की वजह से सविता हलप्पनवार की दुखद मृत्यु आज के आधुनिक युग में भी हमारे अन्धविश्वासी होने का प्रमाण है. पुरे विश्व समुदाय को धार्मिक नेताओं के अधिकारों की सीमा निर्धारित करने पर विचार करने की जरूरत है. आम जीवन में अनावश्यक दखल लगभग सभी धर्म - मजहब के नेताओं का देखा जाता है. दलीय वोट बैंक की राजनीती ने भी इन मान्यताओं को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया है. भारत में भी हर संप्रदाय में इसके उदहारण मौजूद हैं.
सविता हलप्पनवार
धार्मिक नेताओं का कार्य क्षेत्र पूजा-अर्चना और नैतिक शिक्षा-सलाह तक सीमित  रखकर, कानून का आधार इंसानियत-मानवता को बनाकर तथा राजनीती को दल रहित और लाभ रहित बनाकर नए और सुखी समाज की स्थापना की जा सकती है.

ॐ . ੴ . اللّٰه . † …….
Om.Onkar. Allâh.God…..
Jai Hind! Jai Jagat (Universe)!
                                                                           ----------- ग़ुलाम कुन्दनम 

A series of skype group conversations beetween students from India & Pakistan

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